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शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

संसो के बादर छँट गे

अब संसो बादर छँट गे,
अंतस के गाँव म बियान होगे।
खुशी बनगे कमऊलक,
दुःख-पीरा थोरकिन सियान होगे।
पउर हर रहिस हे बैरी,
आँसो हर भोजली मितान होगे।
काली कोड़े रेहेस पखना,
आज ओही मेर तीरथ के खान होगे।
सुघर-सुघर करे रहे सेवा,
उही करम हर संगी फुरमान होगे।

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